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एक नजर इस साल हुईं कुछ बड़ी खोजों के छोटे उस्तादों पर..

नई दिल्ली [जागरण स्‍पेशल]। हमारे देश में डॉक्टर्स और इंजीनियर्स बनने वाले युवाओं की बड़ी संख्या है। लेकिन हाल के वर्षों में रिसर्च एवं इनोवेशन को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। किशोर-युवा अपने आसपास की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए नए इनोवेशंस कर रहे हैं। ये इनोवेशंस ग्रासरूट लेवल से लेकर तकनीक एवं अन्य क्षेत्रों में हो रहे हैं। इनमें भारत के अलावा कई भारतवंशी किशोर-युवाओं का लोहा अब दुनिया भी मानने लगी है। आइए, डालते हैं एक नजर इस साल (2018) हुए कुछ विशेष इनोवेशंस एवं उनके इनोवेटर्स पर...

हर्षवर्धन सिंह झाला

अहमदाबाद के 15 वर्षीय हर्षवर्धन ने एक ऐसा ड्रोन (ईगल ए7) तैयार किया है, जो लैंडमाइंस को डिटेक्ट एवं डेटोनेट कर सकता है। इस टेक्नोलॉजी का नाम मल्टी स्पेक्ट्रल डिटेक्शन है, जो धातु एवं प्लास्टिक के लैंडमाइंस के अलावा अनएक्सप्लोडेड आर्डनेंस, आइईडी, विस्फोटक डिवाइस की पहचान कर सकता है। उनके लोकेशन को ट्रैक कर सकता है।

तिलक मेहता

मुंबई के आठवीं कक्षा के स्टूडेंट तिलक ने एक लॉजिस्टिक कंपनी शुरू की है, जो डब्बावालों की मदद से कम समय में पेपर्स एवं पार्सल्स की डिलीवरी करती है। इन्होंने एक ऐसा ऐप डेवलप किया है, जिस पर लॉगइन करने के बाद कस्टमर्स ऑर्डर कर सकते हैं। इससे डब्बावालों को अतिरिक्त कमाई हो जाती है।

रिफत शारूक

तमिलनाडु के करूर के रहने वाले रिफत को बचपन से स्पेस टेक्नोलॉजी में रुचि थी। इसी ने उन्हें दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट (कलामसैट) बनाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. केसन की मेंटरशिप में इन्होंने सैटेलाइट विकसित किया है।

रिफत शारूक

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका की इस स्टूडेंट ने आइएग्नोसिस नाम से एक 3डी प्रिंटेड लेन्स सिस्टम एवं मोबाइल ऐप डेवलप किया है, जो डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान करेगा। काव्या ने ब्रेन कैंसर के मरीजों के लिए एक सिस्टम डेवलप किया है।

ऋषभ जैन - अमेरिका के ओरेगांव में रहने वाले ऋषभ ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप किया है, जो कैंसर के इलाज के दौरान डॉक्टर्स को पैंक्रियाज को पहचानने में बेहतर मदद कर सकेगा। इसके लिए इन्हें डिस्कवरी एजुकेशन 3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज अवॉर्ड से भी नवाजा गया है।




COMMENTS

Suraj misra

Good work

Ravi

Nice