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Jharkhand : 92.99 करोड़ की सड़क के लिए 541.88 करोड़ रुपये मुआवजा!

रांची :किसी भी राज्य का समुचित विकास तभी हो सकता है, जब उसकी योजनाएं सही ढंग से बनें. काम भी ढंग से हो. झारखंड में एक से बढ़कर एक योजना बनती है. कई बार तो ऐसी योजनाएं भी बन जाती हैं, जिसे सुनकर कोई अनपढ़ भी दांतों तले उंगली दबा ले. अब रांची के राजभवन से कांटाटोली तक प्रस्तावित स्मार्ट सड़क को ही लें. योजना बन गयी. सड़क बनाने पर 92.99 करोड़ रुपये खर्च होंगे. लेकिन, इस सड़क को बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे पर 541.88 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

झारखंड के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने सोशल साईट ट्विटर पर यह मुद्दा उठाया है. उन्होंने यह सवाल उठाते हुए यह भी बताया है कि इस स्मार्ट रोड का भविष्य क्या होगा. श्री पोद्दार लिखते हैं, ‘रांची के राजभवन से कांटाटोली तक बनेगी स्मार्ट सड़क. सड़क बनाने पर खर्च होंगे मात्र 92.99 करोड़ रुपये, लेकिन जमीन अधिग्रहण और मुआवजे में खर्च करने होंगे 541.88 करोड़ रुपये. थोड़ा अजीब नहीं लगता?’ श्री पोद्दार आगे लिखते हैं, ‘कितनी हास्यास्पद बात है. पहले अरबों रुपये के खर्च से 20-20 फीट चौड़े फुटपाथ बनेंगे. फिर धीरे-धीरे इन पर वेंडर्स का कब्जा होगा. फिर सरकार इन्हें हटाने की कोशिश करेगी. फिर आज स्मार्ट रोड की वकालत करने वाले इन वेंडर्स की ढाल बनकर खड़े हो जायेंगे.’

उन्होंने कहा कि बातें स्मार्ट रोड की करते हैं, लेकिन क्या यह ज्यादा जरूरी नहीं कि हम इको फ्रेंडली सड़क के बारे में सोचें, जो पीपुल फ्रेंडली भी हो? उन्होंने कहा, ‘यहां भी दरअसल हरमू फ्लाईओवर की कहानी दुहरायी जा रही है. हरमू रोड में भी फ्लाईओवर के लिए जमीन नहीं चाहिए. 40 फीट के फुटपाथ के लिए जमीन चाहिए. भाई साहब, 40 फीट का फुटपाथ बना देने से सड़क स्मार्ट नहीं हो जाती.’ राज्यसभा के सांसद ने कहा कि देश के किसी भी शहर में 20 फीट के फुटपाथ का उदाहरण नहीं. उन्होंने पूछा कि रांची जैसे शहर में, जहां सड़क किनारे जमीन अधिग्रहण एक बड़ी समस्या है, 20 फीट के फुटपाथ की जिद क्यों है?

राज्यसभा सांसद ने सरकार और अधिकारियों को पुराने अनुभवों से सबक लेने की सलाह दी है. उन्होंने कहा है कि कोलकाता में, रांची में ही मेन रोड पर फुटपाथ पर किस तरह वेंडर्स ने कब्जा कर रखा है. इससे सबक लेने की जरूरत है. उनका कहना है कि स्मार्ट रोड बन भी जाये, तो फुटपाथ पर वेंडर्स का कब्जा कैसे रोका जा सकता है? श्री पोद्दार ने कहा कि उन्हें नहीं लगता अब तक किसी ने इस बिंदु पर सोचा भी है. श्री पोद्दार आगे लिखते हैं, ‘महज बीसफुटिया फुटपाथ के लिए अरबों का खर्च हास्यास्पद लगता है. यूटिलिटी डक्ट के नाम पर सड़क के दोनों तरफ 20-20 फुट की जगह की जरूरत काल्पनिक विचार है. तकनीकी रूप से यह कारगर व टिकाऊ नहीं है. इन पैसों से शहर के लिए और बहुत कुछ हो सकता है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद ने नगर विकास मंत्री को सलाह दी है कि नयी-नयी परियोजनाओं की घोषणा के साथ-साथ लोगों को यह भी बतायें कि केंद्र सरकार ने किस शहर के लिए, किन योजनाओं के मद में कितने पैसे दिये हैं. झारखंड में प्लास्टिक पर प्रतिबंध का उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड में प्लास्टिक कैरी बैग प्रतिबंधित कर दिया गया, लेकिन प्लास्टिक का प्रयोग पूर्णतः रोक पाना संभव नहीं हुआ. बेहतर होगा कि हानिकारक प्लास्टिक का वैकल्पिक प्रयोग सड़क निर्माण जैसी लाभदायक परियोजनाओं में किया जाये. महेश पोद्दार ने कहा कि झारखंड सरकार को तमिलनाडु के राजगोपालन वासुदेवन और जमशेदपुर के जुस्को से सीखना चाहिए. राजगोपालन ने तमिलनाडु में प्लास्टिक की सड़कें बनायीं. उन्हें पद्मश्री मिला है. जमशेदपुर में JUSCO ने भी प्लास्टिक की सड़क बनाने का सफल प्रयोग किया है. उन्होंने पूछा कि क्या झारखंड में प्लास्टिक से सड़क निर्माण के बारे में सोचने का यह सही वक्त नहीं है? श्री पोद्दार ने कहा कि यही शुरू में स्मार्ट रोड होगी.