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बदल रही फितरत, याददाश्त पर भी आफत; जानें-क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सलोनी, रांची। अगर भूलने की बीमारी का जिक्र हो, तो हमारे जेहन में सामान्य तौर पर उम्रदराज लोगों का ही ख्याल आता है। लेकिन बदलते जमाने की फितरत कहें या भाग-दौड़ वाली जिंदगी की मार, अब शहर के युवा भी गुम होते याददाश्त के शिकार हो रहे हैं। कई युवाओं की यादों की गठरी खाली होेने लगी है। जो हाल बुजुर्ग होने पर होना चाहिए था, वह उम्र के पहले पड़ाव पर ही दिखने लग रहा है।

विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इसकी विभिन्न वजहों में तनाव भरा जीवन, बदलती जीवनशैली और काम का बोझ विशेष रूप से शामि हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नींद पूरी करना जरूरी है, जबकि आज-कल लोग नींद से ही दूरी बनाने लगे हैं। दिमाग को आराम देने के लिए गहरी नींद लेना आवश्यक है।

युवावस्था में हो रही अल्जाइमर जैसी बीमारी

मनोवैज्ञानिक डॉक्टर एके नाग के अनुसार, सामान्य तौर पर 60 या इससे अधिक उम्र के लोगों में ही पाई जाने वाली याददाश्त की कमी की समस्या अब युवाओं को भी अपनी चपेट में लेती दिख रही है। आजकल युवाओं में भी हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, शराब पीने की लत और डायबिटीज के कारण अल्जाइमर की शुरुआत होने के मामले देखे जा रहे हैं। पहले डिमेंशिया सिर्फ उम्रदराज लोगों में पाई जाने वाली बीमारी थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज के परिप्रेक्ष्य में यह बीमारी युवाओं में भी पनपती जा रही है।

जानें, क्या कहते हैं एक्सपर्ट

विशेषज्ञ कहते हैं कि जब सोचने, याद रखने और तर्क शक्ति में कमी आती है, तो ये रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगती है। इन कारणों में अल्कोहोल लेना, हारमोन, विटामिन इंबैलेंस और डिप्रेशन सबसे आगे हैं। इस बीमारी में ब्रेन क युवाओं में पनप रही बीमारी यह बीमारी अक्सर उम्रदराज लोगों मेंपाई जाती है। डॉक्टर्स कहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त का कमजोर होना स्वभाविक है। हर 100 में से 70 बुजुर्गों में डिमेंशिया की बीमारी पाई जाती है। लेकिन हैरत की बात यह है कि युवा अवस्था में भी भूलने की बीमारी लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। इस बीमारी में खाना निगलने जैसी होने वाली शारीरिक क्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

जानें, क्या कहते हैं एक्सपर्ट

आजकल 40 में से 25 मरीज ऐसे होते हैं, जो कम उम्र के होते हैं या फिर डिप्रेशन के शिकार हैं। उनकी याद रखने की क्षमता कम हो रही है।