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नक्सलवाद पर अंतिम कील ठोंक रहा स्किल इंडिया

रांची, आशीष झाझारखंड में 12 जनवरी को आयोजित मोमेंटम झारखंड ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी कार्यक्रम में राज्य के 26 हजार से अधिक युवक-युवतियों को रोजगार प्रदान किया गया। इन युवाओं को स्किल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिलाया गया था। बड़ी बात यह रही कि इनमें से 12 हजार युवा राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों से हैं, जबकि 20 हजार से अधिक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग से हैं। इन युवाओं को राज्य में ही जो नौकरियां मिली हैं, उनमें वेतन की अधिकतम सीमा 43 हजार रुपये और न्यूनतम सात हजार रुपये प्रतिमाह तक रही है। अधिकांश नौकरी प्रदाता निजी क्षेत्र से हैं।

राज्य में 24 जिलों में कभी 20 जिले नक्सल प्रभावित थे और अब यह संख्या 19 जिलों तक सिमटी हुई है। कुछ जिलों के शहरी इलाके नक्सलमुक्त हैं, लेकिन ग्रामीण इलाके नहीं। रोजगार पाने वाले इन हजारों युवाओं को जिलेवार बांटा जाए, तो इनमें से सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों से हैं। अति नक्सल प्रभावित खूंटी-गुमला से दो हजार तो गढ़वा-पलामू से भी दो हजार युवक-युवतियों को रोजगार मिला है। यह एक स्पष्ट सा संकेत है, जो नक्सलवाद के जमीनी आधार के खात्मे की ओर इशारा करता है।

कौशल विकास विभाग के निदेशक राजीव रंजन बताते हैं कि कम समय में जिन युवाओं ने बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त किया, उन्हें इस बार मौका मिला, जबकि अनेक युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य रतन तिर्की बताते हैं कि जिन्हें बेहतर पगार मिली वे तो खुश होंगे ही, लेकिन जिन्हें 7-8 हजार की पगार मिली है, वे भी उत्साहित हैं कि उनके लिए बेहतर भविष्य की राह खुल गई। हमारा फोकस ग्रामीण और पिछड़े इलाकों पर था और इसका फायदा इन इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान को भी मिलेगा। इन 26 हजार प्रशिक्षित युवाओं को औसत सात से 43 हजार रुपये मासिक तक पगार मिली है।

अजय कुमार सिंह, सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा व कौशल विकास