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डाक टिकट पर पहली बार महाभारत, पांडव से लेकर द्रौपदी तक का वर्णन

अमित तिवारी, जमशेदपुर।डाक टिकट पर पहली बार महाभारत का वर्णन किया गया है। इसमें अलग-अलग शैली का उल्लेख किया गया है, जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। ईश्वर के दिव्य रूप में राजस्थान की पिछवाई शैली का चित्र आकर्षित कर रहा है। इसी तरह, पांडव व द्रौपदी का वर्णन भी दर्शाया गया है। बिष्टुपुर स्थित प्रधान डाकघर के फिलाटेली विभाग में जारी इस डाक टिकट पर महाभारत को लेकर युवाओं को कर्म का ज्ञान देने का प्रयास किया गया है।

इस सीट में महाभारत के वृत्तांतों के चित्रों को भी देश के अलग-अलग राज्यों की चित्र शैली में बनाया गया है, जिससे लोगों को उन शैलियों के बारे में जानकारी मिल सके। इस टिकट शीट के साथ एक लिफाफा व पंपलेट भी जारी किया है। जिसमें महाभारत की विभिन्न घटनाओं के साथ देश के अलग-अलग प्रांतों की प्रसिद्ध चित्र शौलियों का भी चित्रण किया गया है। एक सीट में कुल अलग-अलग 18 टिकट हैं जिसकी कीमत 430 रुपये रखा गया है। अब तक 50 से अधिक पीस बिक चुका है।

- टिकट एक में ईश्वर के दिव्य रूप में राजस्थान की पिछवाई शैली का चित्र। - टिकट चार में पांडव व द्रौपदी का वर्णन। - टिकट पांच में आंध्र व कर्नाटक क्षेत्र की चकड़े की पुतली शैली में द्रौपदी का चित्रण। - टिकट नौ में बिहार-बंगाल की पटचित्र शैली में पांडवों व द्रौपदी का चित्रण। - टिकट 10 व 13 में मुगल शैली का उल्लेख।

- टिकट 16 व 17 में उत्तर भारत की हिंदू व जैन धर्मग्रंथों की जलचित्र शैली। - टिकट 7, 12 व 14 में हलेब्रिड मंदिर भित्ति चित्रों का चित्रण। - टिकट 8 में महाबलीपुरम के शैलचित्र में अर्जुन के प्रायश्चित प्रसंग का चित्रण।- टिकट 18 में आंध्र की कलमकारी शैली। - टिकट 2, 3, 6, 11 व 15 में एक लोककलाकार की कृतियों से लिए गए है।

कुछ समय पहले रामायण का ज्ञान देने के लिए डाक टिकटों के संग्रह की एक शीट जारी की गई थी। उसकी मांग अब भी बरकरार है। अबतक 250 से अधिक टिकट की ब्रिकी हो चुकी है। यानी करीब 15 हजार का कारोबार। देश के अन्य राज्यों से भी इसकी मांग हो रही है। डाक टिकट पर जारी महाभारत की मांग खूब हो रही है। लोगों को विभिन्न प्रांतों की प्रसिद्ध शैलियों के बारे में जानकारी देना और महाभारत को लेकर युवाओं को कर्म का ज्ञान देना ही इन टिकटों का उद्देश्य है। इसमें गीता के संदेशों को समाहित किया गया है। - विमल किशोर, वरीय डाक अधीक्षक, कोल्हान।