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श्याम बिहारी बांटता था नेताओं, अफसरों और ब्लैकमेलर्स को पैसे

रांची :चारा घोटाले का मास्टर माइंड तत्कालीन क्षेत्रीय पशुपालन अधिकारी श्याम बिहारी सिन्हा का अलग रुतबा था। उसकी पहुंच वरिष्ठ नौकरशाहों से लेकर राजनेताओं तक थी। घोटाले की रकम को वह तमाम नेताओं, अफसरों और ब्लैकमेलर्स में बांटता था। चाईबासा कोषागार से अधिक निकासी मामले में अदालत के फैसले में इसका स्पष्ट जिक्र है। यह जिक्र घोटाले के एक आरोपी दीपेश चांडक के बयान में आया है। श्याम बिहारी सिन्हा का निधन हो चुका है।

आठ दिसंबर 1994 को चारा घोटाले से जुड़े तमाम लोग कोलकाता के ताज बंगाल होटल में जुटे थे। इस दौरान हयात रिजेंसी में आइएएस अधिकारी सजल चक्रवर्ती भी देखे गए थे। बकौल दीपेश चांडक, ताज बंगाल की बुकिंग उन्होंने ही कराई थी। श्याम बिहारी सिन्हा को यहां से किडनी ट्रांसप्लांट कराने आस्ट्रेलिया जाना था। उन्होंने आरके राणा के जरिए लालू प्रसाद को एक करोड़ रुपये भिजवाए थे। इसके अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को 20 लाख रुपये दिए गए थे। डा. रामराज राम के प्रमोशन में भी लालू प्रसाद की भूमिका थी। सीबीआइ ने अपने अनुसंधान में विभिन्न गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। इसके आधार पर ही चाईबासा मामले में कोर्ट ने आरोपियों को सजा सुनाई है।

श्याम बिहारी के बेडरूम तक जाते थे लालू :

पशुपालन विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय पशुपालन अधिकारी की धमक ऐसी थी कि लालू प्रसाद उनके बेडरूम तक जाते थे। दीपेश चांडक ने अपने बयान में जिक्र किया है कि उन्होंने एक बार लालू प्रसाद और आरके राणा को श्याम बिहारी सिन्हा के बेडरूम से निकलते देखा। दोनों के हाथ में एक पालीथिन बैग था। दोनों बैग लटकाए बेडरूम से बाहर निकल रहे थे। श्याम बिहारी सिन्हा ने बताया कि उन्होंने लालू प्रसाद को पांच लाख रुपए दिए हैं। यह भी बताया कि विधान पार्षद कृपानाथ पाठक ने पशुपालन विभाग में अधिक निकासी का मामला उठाया है। मुख्यमंत्री ने उन्होंने लोक लेखा समिति से जांच का भरोसा दिलाया है।

तेज प्रताप समेत लालू के करीबियों का एयर टिकट भी :

पशुपालन घोटाले में दोषी करार पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद समेत तमाम नौकरशाहों की सुख-सुविधा का भरपूर ख्याल रखा जाता था। दस्तावेज की जांच में एयर टिकट पाया गया। टिकट लालू प्रसाद, मुकुल प्रसाद, पीके राय, आरके राणा, हेमा, चंदा, रोहिणी, राजलक्ष्मी, तेज प्रताप, धनु एवं तरुण के नाम था। लालू प्रसाद की बेटियां रांची के विशप बेस्टकाट स्कूल में पढ़ती थीं। उनके स्थानीय अभिभावकों में चारा घोटाले में संलिप्त लोग शामिल थे।

तेज प्रताप समेत लालू के करीबियों का एयर टिकट भी :

चाईबासा ट्रेजरी से अधिक निकासी मामले में अधिकारियों की लापरवाही भी कम नहीं थी। फैसले में इसका जिक्र है कि चाईबासा के तत्कालीन उपायुक्त सजल चक्रवर्ती ने उदासीनता बरती। वे 1992 से 1995 तक उपायुक्त रहे। उपायुक्त के नाते कोषागार का प्रभार उनके पास था। उन्होंने कोषागार में हो रही अनियमितता की ओर न तो ध्यान दिया और न ही वरीय अधिकारियों को इस बाबत सूचित किया। पशुपालन विभाग के तत्कालीन सचिव महेश प्रसाद ने भी कोषागार नियमों को तोड़ा। अधिकारी फूलचंद सिंह ने भी लापरवाही बरती और नियमों की अनदेखी की। वे वित्त आयुक्त के पद पर थे। आय-व्यय के आरंभिक आकलन की जिम्मेदारी उनकी थी। उन्होंने बिहार बजट मैनुअल की अनदेखी की। सिलस तिर्की उस वक्त चाईबासा के कोषागार पदाधिकारी थे। उनकी जवाबदेही महालेखापरीक्षक और आरबीआइ के प्रति थी।

चाईबासा ट्रेजरी से 37.6 करोड़ से ज्यादा निकले :चाईबासा कोषागार से 37.6 करोड़ से ज्यादा रुपये की गलत निकासी हुई। इसमें वरीय प्रशासनिक अधिकारियों समेत पशुपालन घोटाले के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई। गवाह दीपेश चांडक ने फर्जी बिल, बगैर आपूर्ति के निकासी समेत अन्य अनियमितताओं का खुलासा किया है। उस वक्त रांची एयरपोर्ट से भारी नकदी की बरामदगी को भी उन्होंने इसी घोटाले से जुड़ी राशि बताया है। यह पैसे डा. बीएन शर्मा का ट्रांसफर चाईबासा से रोकने के लिए था।