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महज 60 यूनिट रक्त के भरोसे रिम्स, निगेटिव ग्रुप के खून की कमी

शक्ति सिंह, रांची। रिम्स के ब्लड बैंक में रक्त की कमी है। यहां रविवार को सिर्फ 60 यूनिट रक्त रहा। जरूरतमंद मरीज ब्लड की कमी से जूझ रहे हैं। उन्हें दूसरे संस्थानों का आसरा है। ब्लड बैंक में ब्लड की अधिक मांग और मौजूदा स्टॉक कम होने के कारण कई मरीजों को बिना ब्लड के वापस भी लौटना पड़ रहा है। रिम्स का दावा है कि ब्लड की मांग अधिक है और यहां आने वाले कई मरीजों को ब्लड उपलब्ध कराना पड़ रहा है।

रोजाना दे रहे 90 यूनिट ब्लड

रिम्स में सामान्य दिनों में रोजाना 90 यूनिट ब्लड काउंटर से उठता है। दुर्घटना में घायल मरीजों को बिना डोनर के ही ब्लड दिया जाता है। ऐसे में स्टॉक का कम होना स्वाभाविक है। इधर, मरीजों को निजी संस्थानों में ब्लड के लिए 850 रुपये तक देना पड़ रहा है, जबकि रिम्स में सिर्फ 350 रुपये ही देने पड़ते हैं।

दलालों की बढ़ी सक्रियता

पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर दलालों का रैकेट सक्रिय है। 2500 से 5000 तक ब्लड की बिक्री होती है। एबी नेगेटिव ग्रुप के ब्लड की सबसे अधिक कीमत वसूली जाती है। अस्पताल के वार्ड से गेट के बाहर तक दलालों का जाल फैला हुआ है। अस्पताल के कर्मचारी भी इस गोरखधंधे में लिप्त हैं। यही कारण है कि बड़ी सफाई से इस धंधे को अंजाम दिया जा रहा है। डोनर कार्ड पर भी सभी मरीजों को ब्लड नहीं मिल रहा है। रिम्स में फर्जी डोनर कार्ड से दलालों के द्वारा ब्लड लेने के कई मामले सामने आ चुके हैं।

निगेटिव ग्रुप के खून की कमी

पहले ब्लड बैंक में 300 से 500 यूनिट ब्लड रहता था। वर्तमान में विशेषकर निगेटिव ग्रुप के ब्लड को लेकर मरीजों को ज्यादा हो रही है। उनके परिजनों को ज्यादा दर पर ब्लड की व्यवस्था करनी पड़ती है। कुछ ऐसे भी परिजन हैं, जो दलालों के चंगुल में फंस जा रहे हैं और उन्हें एक यूनिट ब्लड के लिए 3000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। रिम्स में ब्लड की कमी है। मरीजों को थोड़ी हो रही है। कैंप लगा कर अधिक ब्लड संग्रह करेंगे। इससे स्टॉक में बढ़ोतरी होगी।

निगेटिव ग्रुप के खून की कमी