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खूंटी : अड़की में विकास के दावे खोखले, 10 वर्षों से सूखी पड़ी है टंकी, पानी को तरस रहे लोग, ग्राम सभ

रांची :खूंटी में अड़की प्रखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में लोग आजादी के 70 साल बाद भी विकास की आस लगाये बैठे हैं. ग्राम सभा के अधिकारी की बात हो रही है.

मूलभूत सुविधाओं से सालों वंचित रहने के कारण ग्राम सभा गांवों के विकास का जिम्मा अब अपने हाथों में लेना चाहती है. लोगों में आक्रोश यूं ही नहीं है. इसका उदाहरण है, अड़की प्रखंड मुख्यालय में बनी पानी टंकी. इसे बने 10 साल हो गये, सप्लाई के लिए पाइप लाइन भी बिछी. पर इससे अब तक लोगों को पानी की सप्लाई नहीं की गयी. इस टंकी से आसपास के गांवों में पानी की सप्लाई की जानी थी. पर आठ साल लोग इसके इंतजार में ही रह गये. दो साल पहले एक बार इस टंकी से पानी की आपूर्ति हुई, तो लोगों की उम्मीद जगी.

पर इसके बाद जलापूर्ति बंद कर दी गयी. अगर पानी की सप्लाई होती, तो लगभग 1200 परिवार के सामने पेयजल की समस्या नहीं होती. उन्हें नाले से पानी नहीं लाना पड़ता. आज अड़की के अधिकतर लोग पानी के लिए इन्हीं नाले या फिर गिने-चुने चापानल पर ही निर्भर हैं. कुछ घरों में कुआं भी है, पर इसका जलस्तर काफी नीचे है. चीरूडीह गांव के प्रधान सागर मुंडा ने बताया : पानी टंकी के बने लगभग वर्षों हो गये हैं. कई बार मंत्री अौर विधायक को इस संबंध में जानकारी दी गयी है.

पर अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ. 25 फरवरी को मंत्री नीलकंठ मुंडा अौर विधायक एक कार्यक्रम में शामिल होने आये थे, उसमें भी इस मामले को उठाना चाहा, पर मौका नहीं मिला. सागर कहते हैं, जब प्रॉपर अड़की में यह हाल है, तो सुदूर गांवों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. खूंटी-अड़की के जंगलों में स्थित गांवों में अभाव और बेबसी की जिंदगी जी रहे लोगों का अब सरकारी योजनाओं से भरोसा उठ गया है. इन इलाकों में विकास की बात बेमानी लगती है. इस कारण अब ग्राम सभा अपना अधिकारी चाहती है, ताकि गांवों में अपने तरीके से वह विकास का खाका खींच सके. गांवों में पत्थलगड़ी की जा रही है. सुदूरवर्ती गांवों के हालात तो खराब हैं ही प्रखंड मुख्यालय की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं कही जा सकती है. प्रखंड मुख्यालय में भी वर्षों से कई योजनाएं पूरी नहीं हो पायीं.

अड़की के सेरेंगहातू गांव निवासी गुलू मुंडा लंबे समय से वृद्धावस्था पेंशन के लिए भटक रहे हैं. उनका गांव प्रखंड कार्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर है. गुलू मुंडा बताते हैं, आधार कार्ड बन गया है. इसके बाद वृद्धावस्था पेंशन के लिए भी कई बार आवेदन दिया. पर पेंशन नहीं मिल रही है. इसके बारे में कोई अधिकारी कर्मचारी भी नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. गुलू ने कहा : वृद्ध होने की वजह से अब खेतों में काम नहीं कर पा रहे. बेटा काम करता है, किसी तरह जिंदगी चल रही है

फर्जी केस कर रही पुलिस पत्थलगड़ी में शामिल होने के आरोप में केस कर दिया:-अड़की के खेसारीबेड़ा निवासी सुरेंद्र मुंडा पर पत्थलगड़ी में शामिल होने के आरोप में पुलिस ने केस कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि सुरेंद्र मुंडा पत्थलगड़ी में शामिल नहीं था. बारूहातू गांव के सुखराम मुंडा को भी पुलिस ने नोटिस भेजा है. उस पर भी पत्थलगड़ी में शामिल होने के आरोप है. इससे लोगों में आक्रोश फैल रहा है. कई जगहों पर ग्रामीणों की शिकायत थी कि पुलिस फर्जी तरीके से केस कर रही है. प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने कहा है कि पत्थलगड़ी संवेदनशील विषय है. आदिवासी समाज की यह परंपरा रही है. आदिवासी समाज की संस्कृति में पत्थलगड़ी है. लेकिन जिस तरह की सूचना आ रही है, उसमें भाजपा इस मामले में राजनीति कर रही है. एक साजिश के तहत इसकी दिशा बदली जा रही है. इसकी दिशा नहीं बदलनी चाहिए. समाज की भावनाओं का ख्याल रखा जाना चाहिए. आदिवासी समाज की परंपरा और संस्कृति से छेड़छाड़ न हो़