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झारखंड : ग्राम सभा को चाहिए हक, लेकिन मंजूर नहीं है पत्थलगड़ी का वर्तमान स्वरूप

II आनंद मोहन/प्रवीण मुंडा/अमन IIखूंटी में अड़की के दर्जनों गांवाें ने पत्थलगड़ी नहीं करने का लिया है फैसला, ग्राम सभा की बैठकों में हो रही चर्चा

यह बैरिकेडिंग नहीं, माचा है जनाब!

खूंटी-अड़की में रविवार को कई गांवों में पत्थलगड़ी हुई. पत्थलगड़ी के समर्थन में हजारों ग्रामीण निकले. प्रभात खबर की टीम इस क्षेत्र के ग्रामीणों की भावनाओं की पड़ताल कर रही है. रविवार को प्रभात खबर की टीम ऐसे गांवों में भी पहुंची, जहां अब तक पत्थलगड़ी नहीं हुई है़ ग्रामीणों और ग्राम प्रधान से इस पर बातचीत की. गांव की दशा, विकास के हालात, उनकी जरूरत पर चर्चा की. अब तक पत्थलगड़ी से दूर रहे इन गांवों के तर्क सुने. जानने का प्रयास किया कि अब तक इन गांवों में पत्थलगड़ी क्यों नहीं हुई. पत्थलगड़ी नहीं करने को लेकर इनके अपने विचार हैं. कहते हैं : ग्राम सभा को अधिकार चाहिए.... पर पत्थलगड़ी का वर्तमान स्वरूप हमें मंजूर नहीं.

रांची. खूंटी के अड़की प्रखंड के इलाके जिस तरह से भौगोलिक रूप से अलग-अलग हैं, उसी तरह पत्थलगड़ी को लेकर भी समाज बंटा है. इसे लेकर अलग-अलग तर्क गढ़े जा रहे हैं. ग्राम सभा में बहस और चर्चा का दौर है. अड़की के जंगल व सुदूर पठारी इलाके के गांवों में पत्थलगड़ी हो रही है. वहीं, इसी क्षेत्र के बड़े इलाके में पत्थलगड़ी के वर्तमान स्वरूप को मंजूर नहीं किया जा रहा. अड़की के कई गांवों में अब तक पत्थलगड़ी नहीं हुई है. अड़की प्रखंड के किसान भवन में 20 से 22 गांव के ग्राम प्रधान शनिवार को जुटे थे. इनके बीच पत्थलगड़ी को लेकर चर्चा हुई.

कई ग्राम प्रधानों का कहना था कि ग्राम सभा को अधिकार चाहिए. विकास की योजनाएं ग्राम सभा चलाये. लेकिन इसके लिए पत्थलगड़ी के माध्यम से व्यवस्था का विरोध नहीं करना चाहिए. कई ग्राम प्रधानों का कहना था कि उनके गांव में इस रूप में पत्थलगड़ी नहीं होगी. इन गांवों में पत्थलगड़ी के लिए बड़े-बड़े पत्थर तराशे गये हैं, लेकिन उन्हें अभी तक लगाया नहीं गया है. ग्राम सभा में लिये जानेवाले फैसले का इंतजार है.