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झारखंड : राज्य में 20.89 लाख शौचालयों का निर्माण हुआ, 13.5 लाख और बनेंगे : आराधना पटनायक

रांची : स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) झारखंड में के तहत झारखंड में 18 फरवरी 2018 तक 20.89 लाख शौचालयों का निर्माण हो चुका है. अब 13.5 लाख शौचालयों का निर्माण किया जाना शेष है. यह काम वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जायेगा. यह जानकारी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने दी. वह सोमवार को रांची प्रेस क्लब में एसबीएम पर आयोजित मीडिया कार्यशाला को संबोधित कर रही थी. श्रीमती पटनायक ने बताया कि एसबीएम शुरू होने से पहले स्लीप बैग (टूटे-फूटे) 4.50 लाख शौचालय बचे हुए थे. इनमें से एक लाख का पुनर्निर्माण कर लिया गया है, जबकि 3.50 लाख बाकी हैं. सचिव ने कहा कि स्वच्छता संकल्प अभियान 26 जनवरी से 25 फरवरी तक चलना है. इसमें 20 दिनों में 1.75 लाख शौचालयों का निर्माण हो चुका है, जो एक रिकाॅर्ड है. उन्होंने बताया कि अबतक रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और हजारीबाग खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो गये हैं. खूंटी, जामताड़ा और लातेहार भी जल्द ही ओडीएफ हो जायेंगे.

व्यवहार परिवर्तन से ही बढ़ेगा शौचालय का इस्तेमाल : एसबीएम के अभियान निदेशक राजेश शर्माने कहा कि लोगों के व्यवहार परिवर्तन से ही शौचालय का इस्तेमाल बढ़ेगा. खुले में शौच समाज हो इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है. इसे छह प्रतिशत जीडीपी बढ़ सकता है. यूनिसेफ की स्टेट हेड मधुलिका जोनाथन ने कहा कि एसबीएम चाइल्ड सर्वाइवल का मेकानिज्म है. डायरिया प्रिवेंशन के लिए यह जरूरी है कि गांव स्वच्छ रहे. 99 प्रतिशत घरों में यदि शौचालय होगा, तो एक तिहाई डायरिया का केस कम हो जायेगा. 40 प्रतिशत बच्चों में कुपोषण कम हो जायेगा. यूनिसेफ के प्रेमचंद ने अलग-अलग इलाकों का अनुभव सुनाया. स्कूलों में शुरू की गयी स्वच्छता की पाठशाला : रामगढ़ जिले के उसरा पंचायत के मुखिया शैलेश ने बताया कि स्कूलों में स्वच्छता का पाठशाला आरंभ की गयी है. रामगढ़ जिले में अब ओडीएफ प्लस अभियान चल रहा है. जहां लोगों को संपूर्ण स्वच्छता की पाठ पढ़ायी जा रही है. कुडू की संगीता उरांव, नगड़ी की करमी उरांव ने भी अपने-अपने अनुभव सुनाये. कार्यक्रम में पीआरडी निदेशक रामलखन गुप्ता व प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश सिंह भी उपस्थित थे.

टॉयलेट एक प्रेम कथा

कार्यक्रम में ओड़िशा के राजकुमार लुगुन ने बताया कि सिमडेगा में उनकी शादी तय हुई थी. जब वह शादी के पहले ससुराल आये, तो देखा कि यहां शौचालय नहीं है. जबकि उनके घर में है. उन्होंने कहा कि पहले शौचालय बनेगा तभी वह शादी करेंगे. इतना ही नहीं उन्होंने खुद ईंट लाकर ससुराल में पहले शौचालय बनवाया. इसके बाद ही बारात आयी.