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झारखंड : कुरमी और तेली को आदिवासी बनाने के प्रस्ताव का हुआ विरोध, कहा, आरक्षण में बंटवारा बर्दाश्त न

रांची : विभिन्न आदिवासी संगठनों के तत्वावधान में शुक्रवार को अलबर्ट एक्का चौक पर आदिवासी विधायकों का पुतला दहन किया गया. इन संगठनों में केंद्रीय सरना समिति (अजय तिर्की गुट), अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, आदिवासी छात्र संघ, झारखंड आदिवासी विकास समिति, जयस युवा आदिवासी, क्षेत्रीय पड़हा समिति हटिया, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, गोंड आदिवासी महासभा, आदिवासी युवा मोर्चा सहित अन्य संगठन शामिल थे. यह पुतला दहन कुरमी एवं तेलीसंगठनों की अोर से अनुसूचित जनजाति में शामिल होने की मांग को लेकर किया गया.

मौके पर अजय तिर्की ने कहा कि आदिवासी विधायकों को शर्म आनी चाहिए कि वे कुरमी अौर तेली को आदिवासी बनाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर रहे हैं. जिस आरक्षण की बदौलत ये लोग (आदिवासी विधायक) सांसद अौर विधायक चुने गये हैं, उसका गलत फायदा न उठायें. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के आरक्षण, हक व अधिकार में बंटवारा बर्दाश्त नहीं करेंगे. इसके खिलाफ हम उग्र आंदोलन करेंगे. सड़क से लेकर संसद तक आदिवासी समाज विरोध प्रदर्शन करेगा. संतोष तिर्की ने कहा कि आदिवासी आज अपने ही राज्य में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. इस लड़ाई में कुरमी या तेली ने कभी साथ नहीं दिया, बल्कि हमेशा आरक्षण खत्म करने की बात कही. पेसा कानून के तहत एकल पद आदिवासियों के लिए सुरक्षित किया गया है. अब इन पर भी खतरा मंडरा रहा है.

कार्यक्रम को अन्य लोगों ने भी संबोधित किया. मौके पर संदीप तिर्की, नारायण उरांव, निरंजना हेरेंज टोप्पो, सावन लिंडा, मुन्ना टोप्पो, रोहित कच्छप, मगन उरांव, सुरेंद्र पासवान, चंदन पाहन, बालि मुंडा, रीता लकड़ा, पून कच्छप, आशा लिंडा, दीपक भगत सहित अन्य लोग उपस्थित थे. कुरमी और अन्य जाति अनुसूचित जनजाति में हुए शामिल, तो जनजातियों का विनाश निश्चित रांची : केंद्रीय सरना समिति (फूलचंद तिर्की गुट) ने कुरमी को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग का विरोध किया है. समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की एवं कार्यकारी अध्यक्ष बबलू मुंडा ने संयुक्त रूप से कहा है कि आज मूल आदिवासी जो अपनी रूढ़ीवादी परंपरा को मानते हैं, उनकी धर्म-संस्कृति नष्ट होने के कगार पर है.

गैर आदिवासी अनुसूचित जनजाति में शामिल होने की मांग कर रहे हैं. कुरमी/कुड़मी अौर तेली भी अब अनुसूचित जनजाति की मांग कर रहे हैं. इसी तरह अगर अन्य जाति भी अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग करने लगे, तो जनजातियों का विनाश निश्चित है. अभी तक जो आरक्षण जनजातियों को हासिल होता रहा है, वह फिर दूसरी जातियों को मिलने लगेगा.

यहां के मूल आदिवासी सिर्फ मजदूर अौर कुली बन कर ही रह जायेंगे. वहीं, आदिवासी जन परिषद के उपाध्यक्ष अभय भुंटकुंवर अौर संगठन सचिव गोपाल बेदिया ने कुरमी अौर तेली संगठनों की अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग का विरोध किया है. अभय भुंटकुंवर ने कहा कि 42 विधायकों अौर सांसदों ने मांगपत्र मुख्यमंत्री को सुपुर्द किया है. यह आदिवासियों को जड़ से समाप्त करने का राजनीतिक षड्यंत्र है.